पत्नी पर हुआ काला जादू

यह जो कहानी मैं आपको बताने जा रहा हूँ, वह बिल्कुल सच्ची है। यह कुछ दिन पहले की ही बात है। मेरी पत्नी की तबीयत रोज-रोज खराब रहा करती थी। एक दिन मैंने अपने दोस्त को बताया तो उसने कहा कि वह एक बाबा को जानता है। उसने मुझे भी उस बाबा के पास जाने को कहा।


तो अगले दिन मैं अपनी पत्नी को लेकर, हम तीनों दक्षिणपुरी त्रिशक्ति मंदिर चले गए। वहां जाकर हमने उस बाबा के साथ बैठकर पूजा की। तो बाबा ने बताया कि इसके ऊपर काला जादू किया गया है। इसके ऊपर एक औरत का साया है और उसको किसी और ने इसके ऊपर भेजा है। और वही औरत इसे पिछले दो सालों से परेशान कर रही है।


फिर बाबा ने मुझसे पूछा, “क्या तुम्हारे घर के दरवाजे के साइड में किसी ने काले कोयले से कोई चित्र बनाया है?” तो मैंने कहा, “हां बाबा, दरवाजे के साइड में एक चित्र बना हुआ है। मुझे लगा वो किसी छोटे बच्चे ने बनाया होगा, इसलिए मैंने उस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया।”


तो बाबा ने कहा कि उसी दरवाजे के ऊपर तुम्हें एक लकड़ी का छोटा टुकड़ा रखा हुआ मिलेगा। उसको निकाल कर फेंक देना। और कल फिर से इसे मेरे पास लेकर आना। और घर जाकर गाय के गोबर से अपने घर को धोना।


उसके बाद हम लोग अपने घर आ गए। और घर आते ही हमने पूरा घर गाय के गोबर से धोया। दीवारों पर जो कुछ भी चित्र बने हुए थे, मैंने वो सब मिटा दिए। दरवाजे के ऊपर मैंने चेक किया तो मुझे वहां एक लकड़ी का टुकड़ा रखा हुआ मिला। मैंने उसे उठाकर घर के बाहर फेंक दिया।

फिर दो दिन बाद रात में हम दोनों अपने बेड पर सो रहे थे। रात के 12 बजकर 40 मिनट पर अचानक हमारा बेड टूट गया। फिर उसके एक घंटे बाद अचानक हमारा पंखा भी बंद हो गया। और फिर थोड़ी देर बाद ही घर की लाइट्स भी जलने-बुझने लगीं।


मेरी बीवी बहुत डर गई। फिर कुछ देर बाद हमारी लाइट्स बिल्कुल बंद हो गईं। घर में अब बिल्कुल अंधेरा हो गया था। मैंने एक कैंडल जलाई और फिर से सोने की कोशिश करने लगा।


सोने के बाद मुझे एक सपना आया। सपने में मैंने देखा कि एक औरत की काली परछाई मेरा पीछा कर रही है। मैं जहां भी जाता, वह मेरे पीछे-पीछे आ जाती। और फिर वह मेरे पास आ गई और मुझसे बोली, “मैं तुम्हारी बीवी को नहीं छोड़ूंगी। उसका कभी बच्चा नहीं होने दूंगी। मैं उसे बहुत तड़पाऊंगी। मैं तुम दोनों को कभी चैन से नहीं जीने दूंगी।” यह बोलकर वह जोर-जोर से हंसने लगी।


तभी मेरी आंख खुल गई। मैंने घड़ी में टाइम देखा, तो 3 बजकर 20 मिनट हो रहे थे। मैं पूरी रात ठीक से नहीं सो पाया। सुबह मैंने अपनी बीवी को सपने वाली बात बताई। फिर हम उसी बाबा के पास गए और रात की सारी बात बताई।


तो बाबा ने कहा कि कोई बात नहीं। डरने की जरूरत नहीं है। मैंने तुम दोनों के लिए तावीज़ बना दिया है। फिर उन्होंने हमें वह तावीज़ दिया और मंदिर में ही एक पूजा करने को कहा। हम दोनों ने पूजा की। पूजा के बाद उन्होंने सफेद सरसों लेकर कुछ मंत्र पढ़े। उसके बाद हम घर आ गए। उस दिन के बाद से मेरी बीवी की तबीयत बिल्कुल ठीक रहती है। न ही मुझे रात में कभी कोई सपना आया। मेरी बीवी ठीक तो हो गई। लेकिन उसके ऊपर यह सब किसने करवाया था, यह सब मुझे आज तक नहीं पता चल सका।

मैं पंजाब के कलानौर गांव का रहने वाला हूं। और मैं जो बात आपको बताने जा रहा हूं ये साल 2006 की है। मैं तब सिर्फ 16 साल का था। मेरा एक बड़ा भाई भी है, जो मुझसे 2 साल बड़ा है। मेरे पापा की गैस वेल्डिंग और बाइक रिपेयर की एक दुकान है। और हम दोनों भाई भी पापा का हाथ बंटाया करते थे। मेरे भाई को तो काम आता था लेकिन मुझे काम के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी।


ये बात गर्मियों की है, जब चावल की फसल की कटाई का समय था। जिस जगह हमारी दुकान थी, वो एक गांव का इलाका था। जहां रात के 8 बजे के बाद कोई भी दिखाई नहीं देता था। सब जगह बिल्कुल सुनसान और अंधेरा हो जाता था। उन दिनों हमारी दुकान के बाहर एक ही लाइट लगी हुई थी। उस लाइट के अलावा आसपास और कोई लाइट नहीं थी।


तो एक रात हमारी दुकान पर एक कॉम्बाइन मशीन वेल्डिंग के लिए आई। हमें उस पर वेल्डिंग करना था। हम दोनों भाई और पापा दुकान में काम कर रहे थे। काम करते-करते काफी देर हो गई। तो पापा ने मुझसे कहा कि तुम अब घर चले जाओ, हम दोनों बाद में आ जाएंगे। क्योंकि मुझे अगली सुबह स्कूल जाना था, इसलिए मैं घर के लिए निकल पड़ा।

हमारा घर दुकान से डेढ़ किलोमीटर दूर है। और रात में वो पूरा रास्ता बिल्कुल सुनसान होता है। थोड़ी ही देर बाद मैं घर पहुंच गया। घर पहुंचकर मैंने फ्रेश होकर खाना खाया और आराम करने लगा। मैं पापा और भाई के आने का इंतजार कर रहा था। लेकिन 12 बजे से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी जब पापा और भाई नहीं आए, तो मम्मी ने कहा कि एक बार जाकर पता कर आओ कि सब कुछ ठीक तो है।


मैं अंधेरे में जाने से डरता हूं, लेकिन मम्मी के कहने पर मैंने हिम्मत करके घर से निकल गया। रास्ते में सब कुछ बिल्कुल सुनसान था। चारों तरफ अंधेरा था। तेज हवाएं भी चल रही थीं। तभी चलते-चलते मुझे वहां किसी बच्चे के रोने की आवाज़ सुनाई दी। आवाज़ सुनकर मैं बहुत डर गया और हनुमान चालीसा पढ़ने लगा। कुछ देर बाद मैं अपनी दुकान पर पहुंच गया।


दुकान पर पहुंचा तो देखा कि वहां तो कोई नहीं था। मतलब कि पापा और भाई वहां से जा चुके थे। तो मैं कुछ देर आराम करने के लिए दुकान के आगे ही बैठ गया। मैं सामने रोड की तरफ देख रहा था, तभी मैंने देखा कि सफेद कपड़े पहने एक आदमी मेरी तरफ चलता हुआ आ रहा है।


मैं उसे पहचानने की कोशिश कर रहा था। फिर वह मेरे पास पहुंच गया। मैं उसे जानता था। मैंने उससे कहा, “भाई, मैं तो यहां दुकान पर भाई और पापा को देखने आया था, लेकिन आप यहां इतनी रात क्या कर रहे हो?” तो वह बोला कि मैं नदी में नहाने के लिए गया था। मैंने हैरानी से उससे पूछा, “इतनी रात को नदी में नहाने?” तो वह बोला कि मुझे बहुत गर्मी लग रही थी।


फिर वह बोला कि चलो अब घर चलते हैं। तो मैंने उसके साथ चलना शुरू कर दिया। मैं उसके साथ बातें करते हुए कुछ ही दूर गया था कि मैंने देखा कि मेरा भाई साइकिल लेकर मेरे सामने पहुंच गया। उसने मुझसे कहा, “जल्दी से साइकिल पर बैठ जा।” मैंने पूछा, “क्या हुआ? इतनी क्या जल्दी है?” तो वह गुस्से में बोला, “जल्दी से बैठ जा।” तो मैं बैठ गया।


मेरे भाई ने मुझसे कहा कि मैं दूर से देख रहा था कि तुम अकेले में किसी से बात करते हुए आ रहे हो। मैंने कहा कि मैंने तो विजय से बात कर रहा था। तो मेरे भाई ने बताया कि विजय को मरे हुए तो 2 साल से ज्यादा हो गए हैं। उसकी मौत उसी रोड पर एक कार एक्सीडेंट में हुई थी। उसकी बात सुनकर मैं बहुत डर गया। मैंने पीछे मुड़कर देखा तो वहां कोई नहीं था।


मेरा नाम मानव है। और मैं आसनसोल का रहने वाला हूं। ये घटना जो मैं बताने जा रहा हूं यह मेरे पापा के साथ हुई थी। यह करीब 10 साल पहले की बात है। उन दिनों मेरे पापा रात की ड्यूटी किया करते थे। और उन्हें घर आते-आते रात के 1-2 बज जाया करते थे। हमारे घर के पीछे एक मजार हुआ करती थी, जहां लोगों पर से भूतों को निकाला जाता था।


रात में पापा घर आते हुए पीछे वाले रास्ते से ही आते थे, क्योंकि उनको अपनी साइकिल पीछे खड़ी करनी होती थी। तो एक रात पापा हमेशा की तरह नाइट ड्यूटी पूरी करके घर आए। उस वक्त हम सब लोग सो रहे थे। तो पापा ने हमें जगाने के लिए अपनी जेब से फोन निकाला। लेकिन तभी उनको हमारे घर के पास एक काला साया खड़ा दिखाई दिया।


पापा को लगा कि वो शायद कोई इंसान है, इसलिए वो डरे नहीं। पापा ने गुस्से में कहा, “पता नहीं कौन इतनी रात को किसी के घर के सामने खड़ा होता है। शर्म भी नहीं आती इन लोगों को।” यह बोलकर पापा ने नाली में थूक दिया। लेकिन पापा के ऐसा करते ही वह साया पापा की तरफ पलटा और भागकर पापा की तरफ आने लगा।


लेकिन तभी मम्मी ने दरवाजा खोल दिया। पापा जल्दी से घर के अंदर चले गए और दरवाजा बंद कर दिया। फिर पापा अंदर आंगन में पहुंच गए और मम्मी को सारी बात बताई। लेकिन बोलते-बोलते ही पापा को चक्कर आया और पापा धड़ाम से नीचे गिर पड़े। गिरने की आवाज़ सुनकर हम सब लोग भी उठ गए। और जल्दी से पापा को उठाकर अंदर बेड पर लेकर आए।

लेकिन बेहोश होने से पहले पापा ने मम्मी को सारी बात बता दी थी। मम्मी समझ गई कि यह पक्का किसी भूत का चक्कर है। तो मम्मी ने पापा के सिर में तेल लगाया और उनकी मालिश करने लगीं। लेकिन ऐसा करते ही पापा का सिर बिल्कुल उल्टा हो गया। उनकी आंखें भी पूरी ऊपर घूम चुकी थीं।


यह देखकर मेरी बहन जोर-जोर से रोने लगी। मेरी दादी ने तुरंत एक ओझा को बुला लिया। ओझा आया तो उसने कुछ झाड़-फूंक किया, तो पापा ठीक हो गए। ओझा ने पापा को एक ताबीज़ दी। उसने बताया कि इनके ऊपर एक बहुत ही खतरनाक भूत का साया आ गया था। और अगर मेरी दादी उसे बुलाने में थोड़ा और देर कर देतीं, तो वह मेरे पापा को मार डालता।


अब मेरे पापा बिल्कुल ठीक हैं। वह आज भी पीछे वाले रास्ते से ही आते हैं। लेकिन उस दिन के बाद से उन्हें वो साया फिर कभी नजर नहीं आया।

मेरा नाम प्रिया है। मैं जो कहानी आपको बता रही हूं ये बात कुछ साल पहले की है। तब हम यूपी में रहा करते थे। मेरे भाई की नई-नई शादी हुई थी। एक बार मेरी भाभी का भाई हमारे घर आया हुआ था।


एक शाम वह एक मूवी देखकर रात 12 बजे घर आया और आकर सो गया। अगली सुबह जब भाभी ने उसे चाय देने के लिए उठाया, तो वह उठ ही नहीं रहा था। फिर भाई ने भी उसे आवाज़ लगाई। तो वह किसी जानवर की तरह डरावनी आवाज़ में गुर्राने लगा। भाई ने उसे पकड़कर हिलाया, तो वह उठकर वहां से भाग गया।


इसी बीच हम सब भी वहां पहुंच गए। हम सबने उसे बुलाने की कोशिश की, लेकिन वह हम सब पर ही गुर्राए जा रहा था और अपने दांत घिसे जा रहा था। हमने उसे पकड़ने की कोशिश भी की, लेकिन उस वक्त वह इतना ताकतवर हो गया था कि हमारे काबू में ही नहीं आ रहा था।


फिर हमने पास में रहने वाले एक भैया को बुलाया। वह भैया जिम करते हैं और बहुत तगड़े हैं। उन्होंने उसे पकड़ने की कोशिश की, लेकिन वह उनके भी काबू में नहीं आ रहा था। फिर उसके बाद हमने एक ओझा को घर बुलाया।

तो ओझा ने बताया कि इसके ऊपर 7 जिन्न का साया है। ओझा ने कहा कि इसे जल्दी से मजार में लेकर जाओ। फिर मेरे भाई भाभी उसे लेकर पास की एक मजार में गए। वहां पहुंचकर मौलवी ने उनके ऊपर झाड़-फूंक किया, तो उनके अंदर के एक जिन्न ने बताया, “मैं एक पत्थर पर बैठा सो रहा था, तो इस लड़के ने मेरे ऊपर पेशाब कर दिया और मुझे नींद से उठा दिया।”


जिन्न ने कहा कि इसने मुझे बहुत गुस्सा दिलाया है। मैं इसे नहीं छोडूंगा। तो मौलवी ने उससे कहा कि “तू इसके शरीर को छोड़ दे।” तो जिन्न बोला, “ठीक है। लेकिन मुझे बदले में 7 किलो रसगुल्ले और नए कपड़े चाहिए। ये सब पानी के पास रख देना। लेकिन ये काम तुम्हें 7 दिन के अंदर करना है।

हम सब तैयार हो गए। अगले ही दिन पापा 7 किलो रसगुल्ले और नए कपड़े लेकर आए और पानी के पास रख दिए। जब तक हमने उसको रसगुल्ले नहीं दिए थे, हमें ऐसा लग रहा था जैसे हमारे घर पर कोई है। लेकिन रसगुल्ले देते ही घर पहले की तरह सामान्य हो गया

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